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खिनवा | KHINAVA

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खिनवा छत्तीसगढ़ की पारंपरिक स्त्री शृंगार का एक महत्वपूर्ण आभूषण है, जो खासकर कान में पहनने वाली गोलाकार डिजाइन की बाली/टकुली होती है। यह सुनहरी चमक वाली, हल्की और आकर्षक होती है, जिसे गांव–गांव की महिलाएँ पारंपरिक पहनावे के साथ पहनती हैं।

  • गोल आकार में बनी यह बाली “खिनवा” के नाम से जानी जाती है।

  • देखने में सुनहरी ढाल जैसी आकृति देती है।

  • इसे पहनने से चेहरा पारंपरिक और सुंदर दिखाई देता है।

  • छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य, तीज–त्योहार, पेंड़रा–जत्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इसका उपयोग बहुत होता है।

  • यह हल्की, टिकाऊ और रोज़मर्रा तथा उत्सव—दोनों में उपयुक्त है।

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