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कलगी | KALAGI

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ये कलगी (KALAGI) पारंपरिक छत्तीसगढ़ी शृंगार की एक बेहद खूबसूरत वस्तु है, जो विशेष रूप से नृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विवाह, पारंपरिक उत्सव और लोक वेशभूषा में इस्तेमाल की जाती है।

1. ऊन से निर्मित (Handmade Wool Kalagi)

  • इन कलगियों में रंग-बिरंगी ऊन का उपयोग किया गया है।

  • ऊपर की तरफ इसे फूल की आकृति में फुलाया जाता है, जो दिखने में आकर्षक लगता है।

  • बीच-बीच में चमकीली सिल्वर स्ट्रिप्स डाली गई हैं जिससे इसे झिलमिलाहट मिलती है।

2. लकड़ी/प्लास्टिक की डंडी

  • नीचे की ओर मजबूत डंडी होती है, जिसे ऊन से लपेटकर सुंदर बनाया जाता है।

  • अंत में सुनहरा रंग दिया जाता है जिससे यह राजसी लुक देती है।

3. लोक-नृत्य में उपयोग

यह कलगी अक्सर उपयोग होती है—

  • सुआ नृत्य

  • राऊत नाचा

  • देवाली नृत्य

  • गौरी-गौरा सजावट

  • पारंपरिक तीज-त्योहारों में

4. छत्तीसगढ़ी पहनावे की पहचान

  • यह छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

  • पुरुषों की पारंपरिक पगड़ी, फुल्ला और नाच परिधानों में इसका विशेष स्थान है।

  • इसे अक्सर रंगीन नारियल, फूल या मोरपंख के स्थान पर भी लगाया जाता है।

इसकी खासियतें

  • पूरी तरह हैंडमेड

  • हल्की और टिकाऊ

  • कम लागत में आकर्षक सजावट

  • अलग-अलग कलर कॉम्बिनेशन में उपलब्ध

  • किसी भी पारंपरिक वेशभूषा को तुरंत भव्य रूप देती है

कहाँ उपयोग होती है?

  • नाच-गान के कलाकार

  • विविध लोकनृत्य समूह

  • पारंपरिक पोशाक किराये की दुकानों में

  • सिरपोश और पगड़ी सजावट

  • शादी-विवाह एवं सांस्कृतिक समारोह

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