खिनवा छत्तीसगढ़ की पारंपरिक स्त्री शृंगार का एक महत्वपूर्ण आभूषण है, जो खासकर कान में पहनने वाली गोलाकार डिजाइन की बाली/टकुली होती है। यह सुनहरी चमक वाली, हल्की और आकर्षक होती है, जिसे गांव–गांव की महिलाएँ पारंपरिक पहनावे के साथ पहनती हैं।
गोल आकार में बनी यह बाली “खिनवा” के नाम से जानी जाती है।
देखने में सुनहरी ढाल जैसी आकृति देती है।
इसे पहनने से चेहरा पारंपरिक और सुंदर दिखाई देता है।
छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य, तीज–त्योहार, पेंड़रा–जत्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इसका उपयोग बहुत होता है।
यह हल्की, टिकाऊ और रोज़मर्रा तथा उत्सव—दोनों में उपयुक्त है।